महाराष्ट्र सरकार ने किसानों की मांगे मानी; 6 दिनों से चल रहा आंदोलन 6 महीनें के आश्वासन पर ख़त्मNews Opinion 

महाराष्ट्र सरकार ने किसानों की मांगे मानी; 6 दिनों से चल रहा आंदोलन 6 महीनें के आश्वासन पर ख़त्म

विगत 6 मार्च से चल रहा महाराष्ट्र किसान आंदोलन, जिसमे करीब 50,000 किसानो ने भाग लिया आखिरकार सरकार से लगभग तीन घंटे के बातचीत के बाद समाप्त हुआ। वार्ता के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने कहा की किसानो की मांगे न सिर्फ मान ली गईं, बल्कि उन्हें लिखित आश्वासन भी दिया गया है। सरकार के एक मंत्री विष्णु सावरा ने कहा की 6 महीने क अंदर इन मांगों पर काम शुरू हो जायेगा। किसानों ने यह रैली रविवार, 6 मार्च को नाशिक से 180 किलोमीटर पैदल चल कर मुंबई के आजाद मैदान में सोमवार से शुरू की थी।

मुख्यमंत्री फड़णवीस ने मुख्य सचिव को इन मांगों पर व्यग्तिगत तौर पर ध्यान देने को कहा है।सरकार और किसानों के बीच चले बातचीत में लगभग 14 मुद्दों पर चर्चा की गईं।

प्रमुख मुद्दें

– संपूर्ण कर्ज माफी
– कृषि उत्पाद को दोगुना भाव मिले
– स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों पर अमल हो
– वन अधिकार कानून पर अमल हो
– जिस जमीन पर आदिवासी खेती कर रहे हैं, उसे आदिवासिओं के नाम पर किया जाये
– नदी जोरो परियोजना से सिंचाई क लिए पानी मिले
– बिजली के बिल में छूट मिले

सरकार के लिखित आश्वासन देने के बाद किसानों के नेता हरीश नवले ने आंदोलन वापस लेने का भरोसा दिया।
किसानों ने सरकार के साथ बातचीत को सफल बताया। उन्होंने कहा,”सरकार ने हमारी मांगे मान ली है”। हम खुश हैं|

रखा ट्रैफिक का पूरा ख्याल
किसानों ने अपने आंदोलन के दौरान मुंबई वासिओं को कोई तकलीफ नहीं होने दी। 50,000 किसानों के जमावड़े के बावजूद पुलिस को दक्षिण मुंबई का यातायात भी इधर उधर करने की जरूरत महसूस नहीं हुई।

मुंबई वासिओं का पूरा सहयोग
मुंबई के डब्बे वालों ने किसानों  लिए भोजन का प्रबंध किया। इसके अलावा महानगर क कुछ लोगों ने आजाद मैदान में जुटे किसानों के लिए पानी और खाने की सामग्रियों का व्यवस्था किया। शरीर में पानी की कमी के वजह से कुछ किसानों को डायरिया हो गया तो पैदल चलने के वजह से कुछ के पैरों में छाले पर गए। इलाज के लिए आजाद मैदान में डिस्पेंसरी का इंतजाम भी किया गया था।

 

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